Friday, December 19, 2025

Bharat Taxi is bringing a new revolution to road transportation

Friday, December 18, 2025 at 21:18 Regarding Bharat Taxi

Women will have the option to choose a female driver

Images courtesy of Bharat Taxi App
Mohali: December18, 2025: (Media Link Team//Hindustan Screen//हिंदुस्तान स्क्रीन Desk)::

People who relied on taxis or cabs for transportation were frustrated. Cab drivers would arrive late at their own discretion and demand more than the agreed-upon fare. They would double the amount or even demand more. People were troubled. The situation worsened during the rainy season.

For those who were frustrated from cab service, good news has arrived for the new year. This good news is related to the launch of Bharat Taxi. It will likely be officially launched on January 1st. This new taxi service is a government-backed, cooperative-operated ride-hailing platform, being launched in collaboration with cooperative institutions (NCDC, IFFCO, AMUL, etc.) and NeGD (Digital India) as an alternative to Ola and Uber. Its aim is to empower drivers, provide affordable service with transparent fares and zero surge pricing, and it is expected to launch in Delhi from January 2026.

Its main features have entered the market with attractive offers. People are enthusiastic and happy about it. They feel a great sense of relief since its announcement. They feel their concerns have been heard.

Most importantly, it is a cooperative model. This platform makes drivers owners, allowing them to receive more than 80% of the fare, providing them with financial stability. They feel that this income belongs to them and not to anyone else.

This new taxi service will offer transparent and affordable fares. There will be no surge pricing, ensuring fair and predictable rates for passengers. People will not feel cheated.

Furthermore, there will be digital integration. It will be integrated with national digital platforms like DigiLocker and UMANG. This will also increase trust among the general public. Currently, people remain apprehensive until they reach their destination.

The new features introduced by Bharat Taxi will also benefit drivers, as this new system is driver-centric. Both the passenger and the driver are taken care of. This system offers drivers the option of better income. It also includes additional benefits. These new features will mean a better life than before. These benefits include provisions for medical assistance and education. This will give drivers a new lease on life, and their families will also experience improved living conditions. They will see and feel the progress.

This new taxi system, launched under the name Bharat Taxi, will also have government support. Large cooperative institutions like NCDC, IFFCO, AMUL, KRIBHCO, NAFED, NABARD, NDDB, and NCEL are promoting it, and NeGD is providing technical support. Its arrival will transform taxi services. People will get a new experience.

The objective is also to create a global standard. To provide a citizen-centric, cooperative alternative to global ride-hailing companies. Its arrival will bring about many new and pleasant experiences for people. After this service is implemented, you will see a new glow on people's faces.

Everyone will feel that realizing the vision of Digital India has become simpler and easier. The time for its launch and progress is constantly approaching. You will soon see a new revolution on the country's roads. Bharat Taxi is bringing about a new change.

भारत टैक्सी से आ रही है सड़क की आवाजाई में नई क्रांति

Friday 18th December 2025 at 21:18 Regarding Bharat Taxi 

महिलाओं के लिए होगी महिला ड्राईवर के चुनाव की सुविधा 

तस्वीरें Bharat Taxi App से साभार
मोहाली//चंडीगढ़: 18 दिसंबर 2025: (मीडिया लिंक टीम//Hindustan Screen//हिंदुस्तान स्क्रीन डेस्क)::

टैक्सी या कैब के ज़रिए आवाजाई करने वाले लोग निराश हो चुके थे। कैब वाले सवारी को लेकर मनमर्ज़ी की देर कर के पहुंचते थे और जो कराया तय करकेबुकिंग करते थे अदायगी उससे ज़्यादा की चाहते चाहते थे। अमाउंट को डबल करके मांगना या फिर इससे भी ज़्यादा की डिमांड करना ।  लोग परेशान थे। बारिश वाले मौसम में नखरे और भी बढ़ जाते थे। 

जो लोग निराश थे उनके लिए नए बरस पर अच्छी खबर आई है। यह अच्छी खबर भारत टैक्सी की शुरुआत की खबर से सबंधित है। पहली जनवरी शायद विधिवत इसकी शुरुआत हो जाएगी। यह नई टैक्सी सरकार समर्थित, सहकारी-संचालित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे ओला और उबर के विकल्प के रूप में सहकारी संस्थानों (NCDC, IFFCO, AMUL आदि) और NeGD (डिजिटल इंडिया) के सहयोग से शुरू किया जा रहा है, जिसका लक्ष्य ड्राइवरों को सशक्त बनाना, पारदर्शी किराए और शून्य सर्ज प्राइसिंग के साथ किफायती सेवा देना है, और यह जनवरी 2026 से दिल्ली में लॉन्च होने की पूरी पूरी उम्मीद है। 

इसकी मुख्य विशेषताएं अच्छी पेशकश के साथ बाज़ार में आई हैं। लोगों में इसे लेकर उत्साह और प्रसन्नता है। लोग इसकी घोषणासे ही बहुत राहत महसूस कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि उनकी सुनी गई। 

सबसे बड़ी बात कि यह एक तरह से सहकारी मॉडल ही है। यह प्लेटफॉर्म ड्राइवरों को मालिक बनाता है, जिससे उन्हें किराए का 80% से ज़्यादा हिस्सा मिलता है और इससे उन्हें वित्तीय स्थिरता मिलती है। उनको लगता है की यह कमाई हमारी ही है किसी और की नहीं। 

इस नई टैक्सी की सुविधा में पारदर्शी और किफायती किराया होगा। इसमें सर्च प्राइसिंग (बढ़े हुए किराए) नहीं होगी, जिससे यात्रियों को उचित और अनुमानित दरें मिलेंगी। लोगों को ऐसा नहीं लगेगा कि वे ठगे गए। 

इसके साथ ही यह भी कि डिजिटल एकीकरण भी होगा। यह DigiLocker और UMANG जैसे राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत होगा। इससे आम लोगों में भी विश्वास बढ़ेगा। इस समय हालत यह है कि जब तक सवारी अपनी मंज़िल तक पहुँच नहीं जाती तब तक मन में आशंकाएं लगी रहती हैं। 

भारत टैक्सी वाले जिन नई सुविधाओं के साथ आए हैं उनसे ड्राइवरों को भी फायदा होगा क्यूंकि यह नया सिस्टम ड्राइवर-केंद्रित भी है। सवारी के साथ साथ ड्राईवर का भी ध्यान रखा जाता है। ड्राइवरों के लिए बेहतर आय का विकल्प है इसी सुविधा में। इसके साथ ही नहीं सुविधाएं भी हैं। इन नई सुवधाओं का मतलब होगा अब पहले से बेहतर ज़िंदगी। यह सुविधाएं बहुत कुछ लेकर आई हैं जैसे मेडिकल सहायता और शिक्षा के लिए प्रावधान। इससे ड्राइवरों को एक नई ज़िंदगी का अहसास होगा साथ ही उनके परिवारों को भी पहले से बेहतर ज़िंदगी के हालात का अहसास होगा। उन्हें तरक्की आती दिखाई भी देगी और महसूस भी होगी।  

भारत टैक्सी के नाम से आए इस नए टैक्सी सिस्टम को सरकारी समर्थन भी होगा। अब  NCDC, IFFCO, AMUL, KRIBHCO, NAFED, NABARD, NDDB, और NCEL जैसे बड़े सहकारी संस्थान इसे बढ़ावा दे रहे हैं, और NeGD तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है। इसके आने से बदल जाएगी टैक्सी की सुविधा। लोगों को मिलेगा एक नया अनुभव । 

इसे लाने का उद्देश्य यह भी है कि एक ग्लोबल स्टैंडर्ड का अहसास हो। वैश्विक राइड-हेलिंग कंपनियों को एक नागरिक-केंद्रित, सहकारी विकल्प प्रदान करना। इसके आने से लोगों को बहुत ही नए और सुखद अनुभव होने लगेंगे। इस सुविधा के बाद आपको नज़र आएगी लोगों के चेहरों पर नै चमक। 

सभी को महसूस होगा कि डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण को साकार करना अब सरल और सहज हो गया है। इसकी लॉन्च और प्रगति का समय अब लगातार दस्तक दे रहा है। आपको जल्द ही देश की सड़कों पर नज़र आएगी एक नै क्रांति। भर्ती टैक्सी ला रही है एक नया बदलाव। 

दिसंबर 2025 में इसके लॉन्च होने की उम्मीद है और दिल्ली में 1 जनवरी 2026 से शुरू होने की संभावना है। दिल्ली और गुजरात में इसके परीक्षण (ट्रायल) शुरू हो चुके हैं। चंडीगढ़, मोहाली और पंजाब में भी इसकी चर्चा पोरे ज़ोरों पर है। नया वर्ष 2026 जिन बदलावों को ला रहा है उनमें एक बदलाव का नाम भारत टैक्सी भी है। 

Friday, December 12, 2025

हैंडलूम हाट, नई दिल्ली में भारत की हस्तकला धरोहर को दिखाने वाली प्रदर्शनी, क्राफ्ट-कथा–2025

वस्‍त्र मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//12th December 2025 at 7:41 PM by PIB Delhi Regarding Handloom Haat 

प्रविष्टि तिथि: 12 DEC 2025 7:41PM by PIB Delhi

श्रीमती सुधा मूर्ति, संसद सदस्य (राज्य सभा), ने किया उद्घाटन

नई दिल्ली: 12 दिसंबर 2025(PIB//Hindustan Screen//हिंदुस्तान स्क्रीन-डेस्क)

क्राफ्ट कथा वास्तव में एक ऐसा प्रयास है जिससे क्राफ्ट की दुनिया का एक नया इतिहास लिखा जा रहा है। यह प्रयास है देश की हस्तकला को नै उंचाईयों पर पहुंचाने का। इस की शुरुआत कब और कैसे हुई इसका पूरा विवरण भी आप पढ़ सकते हैं केवल यहां क्लिक कर के। 

संसद सदस्य (राज्य सभा) श्रीमती सुधा मूर्ति ने आज हैंडलूम हाट, जनपथ, नई दिल्ली में भारत भर के कारीगरों को दिखाने वाली प्रदर्शनी, “क्राफ्ट-कथा – 2025” का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी राष्ट्रीय हस्तशिल्प और धरोहर सप्ताह 2025 समारोह के अंतर्गत आयोजित की गयी है। उनके साथ विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) सुश्री अमृत राज, विकास आयुक्त (हैंडलूम) डॉ. एम. बीना और वस्त्र मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


क्राफ्ट-कथा – 2025 का उद्देश्य सतत आजीविका को बढ़ावा देकर, युवा शिल्पकारों को प्रोत्साहित करके और स्थानीय स्तर पर शिल्प इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाकर भारत की कलात्मक विरासत का जश्न मनाना है। आगंतुकों को लाइव प्रदर्शन, शिल्प कथावाचन सत्र, विशिष्ट हस्तशिल्प संग्रह और शिल्पकारों के साथ आपसी संवाद आदि का अनुभव करने का अवसर मिलेगा।


यह कार्यक्रम राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम (एनएचडीसी) और अखिल भारतीय कारीगर और शिल्प श्रमिक कल्याण संघ (एआईएसीए) के सहयोग से आयोजित किया गया है, यह पहल भारत की विविध शिल्प परंपराओं, प्रमुख कारीगरों और अनोखे हस्तशिल्प उत्पादों को एक मंच पर लाती है।

यह पहल हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय (हस्तशिल्प) द्वारा कारीगरों को सशक्त बनाने, शिल्प समूहों का समर्थन करने और भारत के जीवंत हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने से जुड़े निरंतर प्रयासों को रेखांकित करती है। यह कार्यक्रम शिल्प प्रेमियों, खरीदारों, डिजाइनरों, छात्रों और आम जनता के लिए दिल्ली के जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में 11 दिसंबर 2025 तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 8 बजे तक खुला है, ताकि वे भारत की रचनात्मकता और शिल्प कौशल का अनुभव कर सकें।

***पीके/केसी/जेके/एसएस//--(रिलीज़ आईडी: 2203351)

Smt. Sudha Murty, M.P. (Rajya Sabha) inaugurates Craftकथा–2025

Ministry of Textiles//12th December 2025 at 7:41 PM by PIB Delhi Regarding Handloom Haat 

Exhibition Showcasing India’s Craft Heritage in Handloom Haat, New Delhi

New Delhi: 12th December 2025: (PIB//Hindustan Screen//हिंदुस्तान स्क्रीन-डेस्क)::

Craft Katha is truly an endeavor that is writing a new chapter in the history of the craft world. It is an effort to take the country's handicrafts to new heights. You can read the complete details of how and when it all started by simply clicking here.

Craftकथा–2025”, an exhibition showcasing artisans from across India, was inaugurated today by Smt. Sudha Murty, Member of Parliament (Rajya Sabha), at Handloom Haat, Janpath, New Delhi, as part of the National Handicrafts & Heritage Week 2025 celebrations. She was accompanied by Development Commissioner (Handicrafts) Ms. Amrit Raj, Development Commissioner (Handlooms) Dr. M. Beena, and other senior officials of the Ministry of Textiles.


Craftकथा–2025 aims to celebrate India's artistic heritage by promoting sustainable livelihoods, encouraging young artisans, and strengthening grassroots craft ecosystems. Visitors will have the opportunity to experience live demonstrations, craft storytelling sessions, exclusive handcrafted collections, and interactive engagements with artisans.


The event was organized in collaboration with the National Handloom Development Corporation (NHDC) and the All India Artisans & Craft workers Welfare Association (AIACA), the initiative that brings together India’s diverse craft traditions, master artisans, and unique handmade products on a single platform.

The initiative underscores the continued efforts of the Office of the Development Commissioner (Handicrafts) to empower artisans, support craft clusters, and expand market access for India’s vibrant handicraft sector. The event is open to craft lovers, buyers, designers, students, and the general public to experience India’s creativity and craftsmanship at Handloom Haat, Janpath, New Delhi, from 11 AM to 8 PM daily till 17 December 2025.

****//MAM//(Release ID: 2203269)

Wednesday, November 26, 2025

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव में ईरान और इराक का एक साथ

 

ईरान और इराक के फिल्म निर्माताओं ने एक साथ आकर दबाव में जीवन के रोमांचक सिनेमाई अनुभव साझा किए


*'माई डॉटर्स हेयर' ईरान की सामाजिक वास्तविकताओं को गहराई से छूती है

*'द प्रेसीडेंट्स केक' तानाशाही के दौर में जीवन का एक टुकड़ा पेश करता है

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में आज एक संवाददाता सम्मेलन में ईरान और इराक के फिल्म निर्माताओं ने एक साथ मंच साझा किया और असाधारण परिस्थितियों से जूझ रहे आम लोगों की कहानियों के बारे में जानकारी दी। अशांत इतिहास वाले दो देश, राजनीतिक दबावों से उपजी दो फ़िल्में और एक समान विश्वास से एकजुट दो टीमें, अपने-अपने देशों के भावनात्मक मानचित्रण को चित्रित करने के लिए, व्यक्तिगत स्मृतियों को सामूहिक ज़ख्मों से जोड़ते हुए एक साथ आईं।

ईरानी फीचर फिल्म 'माई डॉटर्स हेयर (राहा)' का प्रतिनिधित्व करते हुए, फिल्म के निर्देशक सैयद हेसम फरहमंद जू और निर्माता सईद खानिनामाघी इस बातचीत में शामिल हुए। यह फिल्म आईएफएफआई में 'निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फीचर फिल्म' श्रेणी में प्रतिस्पर्धा कर रही है। आईसीएफटी यूनेस्को गांधी पदक के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही इराक की फिल्म 'द प्रेसिडेंट्स केक' के संपादक एलेक्ज़ेंड्रो-राडू राडू ने फिल्म के अनूठे रूप और तानाशाही के दौर में जीवन के उसके स्पष्ट चित्रण के बारे में बात की।

संकट में एक मध्यमवर्गीय परिवार, चिंतन में एक देश

हेसम ने बताया कि 'माई डॉटर्स हेयर' उनके अपने जीवन के अनुभवों से उपजी है। उन्होंने बताया, "मैं अपने देश की महिलाओं की स्थिति को चित्रित करना चाहता था।" उन्होंने बताया कि कैसे राहा की कहानी, जो लैपटॉप के लिए अपने बाल बेचती है, आर्थिक तंगी से जूझ रही अनगिनत महिलाओं द्वारा किए गए मौन त्याग को दर्शाती है।

निर्माता खानिनामाघी ने संदर्भ को और विस्तार से बताते हुए कहा कि कैसे हाल के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने ईरान में जीवन स्तर को तेज़ी से खराब कर दिया है।

उन्होंने कहा, "लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। मध्यम वर्ग गरीब होता जा रहा है। हमारी फिल्म में, एक लैपटॉप की वजह से एक परिवार की पूरी अर्थव्यवस्था चौपट हो जाती है। हमारे समाज में ठीक यही हो रहा है।"

फिल्म की दृश्य भाषा के बारे में पूछे जाने पर, हेसम ने मज़दूर वर्ग की कहानियों पर अक्सर थोपे जाने वाले "नीरस गरीबी" के सौंदर्यबोध को नकार दिया। उन्होंने कहा, "मैं चाहता था कि फ्रेम बिल्कुल ज़िंदगी जैसे दिखें। गरीब परिवारों के भी रंगीन और खुशनुमा पल होते हैं। वे हँसते हैं, जश्न मनाते हैं, अपनी ज़िंदगी में रंग भरते हैं। मैं अपने फ्रेम के सौंदर्यबोध के ज़रिए उस सच्चाई को दिखाना चाहता था।"

हेसम ने ऐसी सामाजिक जड़ों से जुड़ी कहानियों को व्यावसायिक सिनेमा में लाने की इच्छा के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, "पहले, इन फिल्मों को व्यावसायिक नहीं माना जाता था। मैं इसे बदलना चाहता हूँ।" उन्होंने इशारा किया कि उनकी अगली फिल्म भी इसी दर्शन पर आधारित है।

खानिनामाघी ने ईरानी सिनेमा के वर्तमान परिदृश्य पर बात करते  हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि फ़िल्म निर्माता सीमाओं को लांघ रहे हैं, फिर भी उनका फ़िल्म उद्योग सेंसरशिप से जूझ रहा है। उन्होंने कहा, "फ़िल्मों के कुछ हिस्से काट दिए जाते हैं जिसके कारण दर्शकों को पूरी कहानी समझने में मुश्किल होती है।"

डर में जन्मी एक परीकथा

1990 के दशक के इराक की बात करते हुएएलेक्ज़ैंड्रू-राडू राडू ने ' प्रेसिडेंट्स केकको "सड़क पर रहने वाले कलाकारोंके अभिनय पर आधारित फ़िल्म बताया। सभी कलाकार गैर-शेवर हैंजिन्हें रोज़मर्रा की ज़िंदगी से चुना गया हैजो फ़िल्म को एक विशिष्ट तात्कालिकता प्रदान करता है।

राडू ने बताया कि फिल्म इस बात पर केंद्रित है कि कैसे प्रतिबंध और सत्तावादी शासन निम्न वर्ग को कुचलते हैं। उन्होंने कहा, "जब ऐसी घटनाएँ होती हैं, तो तानाशाह नहीं, बल्कि जनता को कष्ट होता है।" उन्होंने बताया कि कैसे फिल्म की कहानी एक तानाशाह द्वारा नागरिकों को अपना जन्मदिन मनाने के लिए मजबूर करने से प्रेरित है। सद्दाम हुसैन के लिए केक बनाने का काम सौंपे जाने वाली एक छोटी लड़की लामिया की कहानी बेतुकेपन और हकीकत के बीच झूलती है।

उन्होंने कहा कि निर्देशक हसन हादी ने इस कहानी को एक परीकथा की तरह देखा था।

राडू ने बताया, "हसन चाहते थे कि लामिया इराक का प्रतीक बने। उसके साथ जो कुछ भी हो रहा है, वह देश में हो रही हर घटना को दर्शाता है।" राडू ने इराक के युवा और उभरते फिल्म उद्योग के बारे में भी बात करते हुए कहा, "ईरान के विपरीत, इराक में कोई समृद्ध फिल्म परंपरा नहीं है। 'द प्रेसिडेंट्स केक' इराक की पहली आर्ट-हाउस फिल्म है। हसन जैसे निर्देशक अब उस उद्योग का निर्माण कर रहे हैं।"

अलग-अलग देशों और सिनेमाई परंपराओं से आने के बावजूद, दोनों फिल्में एक जैसी सच्चाइयों को दर्शाती हैं: प्रतिबंधों का बोझ, आम लोगों की सुगमता और राजनीतिक दबाव में रोज़मर्रा की गरिमा की बातचीत। अंत में, बातचीत तेहरान से बगदाद तक फैले एक पुल की तरह लगी, जो राजनीति से नहीं, बल्कि कहानी कहने से बना है।

संवाददाता सम्मेलन का लिंक:

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के बारे में

वर्ष 1952 में स्थापित, भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) दक्षिण एशिया में सिनेमा के सबसे पुराने और सबसे बड़े उत्सव के रूप में प्रतिष्ठित है। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और गोवा मनोरंजन सोसायटी (ईएसजी), गोआ सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित, यह महोत्सव एक वैश्विक सिनेमाई शक्ति के रूप में विकसित हुआ है, जहाँ पुनर्स्थापित क्लासिक्स का मिलन साहसिक प्रयोगों से होता है और दिग्गज कलाकार, पहली बार आने वाले निडर कलाकारों के साथ मंच साझा करते हैं। आईएफएफआई को वास्तव में आकर्षक बनाने वाला इसका विद्युत मिश्रण है—अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ, सांस्कृतिक प्रदर्शनियाँ, मास्टरक्लास, श्रद्धांजलि और ऊर्जावान वेव्स फिल्म बाज़ार, जहाँ विचार, सौदे और सहयोग उड़ान भरते हैं। 20 से 28 नवंबर तक गोआ की आश्चर्यजनक तटीय पृष्ठभूमि में आयोजित, 56वाँ भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भाषाओं, शैलियों, नवाचारों और आवाज़ों की एक चकाचौंध भरी श्रृंखला, विश्व मंच पर भारत की रचनात्मक प्रतिभा का एक गहन उत्सव का वादा करता है।

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इफ्फी वेबसाइट: https://www.iffigoa.org/

पीआईबी की इफ्फी माइक्रोसाइट: https://www.pib.gov.in/iffi/56/

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Wednesday, October 8, 2025

“राष्ट्रीय श्रम एवं रोजगार नीति-श्रम शक्ति नीति 2025”

 प्रविष्टि तिथि: 08 OCT 2025 at 4:34 PM by PIB Delhi

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने मसौदे पर जनता से प्रतिक्रिया आमंत्रित की


नई दिल्ली
: 9 अक्टूबर 2025: (पीआईबी दिल्ली / /हिंदुस्तान स्क्रीन डेस्क )::

मज़दूरों और वर्करों को लेकर अक्सर सभी सरकारें आवश्यक प्रावधान भी लाती ही हैं। वर्करों को पूरी सुरक्षा और अच्छे वेतन के साथ उनको सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं भी मिलें। काम के लिए अच्छे वेतन और अच्छे माहौल की मांग भी बनती ही है। इसी तरह के हालात में ही चले थे शिकागो के संघर्ष। मई का प्रथम सप्ताह बहुत कुर्बानी वाला बन गया था। इसी संघर्ष से लाल झंडा बहुत बुलंद हो कर सामने आया था। अब कई बरसों से मज़दूर असंतुष्ट हैं। अब देखना है की क्या नई शर्म नीति उन्हें संतुष्ट कर पाएगी? काया नई शर्म नीति-2025 उन्हें बेहतर वेतन और बेहतर सुविधाएं दे पाएगी? फिलहाल सरकार ने सभी से इस मसौदे पर  सभी से उनके सुझाव और विचार भी मांगें हैं। देखते हैं इक नज़र कि क्या है इस मसौदे में? सरकार क्या क्या ला रही है मज़दूरों के लिए इस नई श्रम नीति 2025 के अंतर्गत? 

भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने राष्ट्रीय श्रम एवं रोजगार नीति - श्रम शक्ति नीति 2025 का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी कर दिया है। यह मसौदा नीति, विकासशील भारत @2047 की राष्ट्रीय आकांक्षा के अनुरूप एक निष्पक्ष समावेशी और भविष्योन्मुख कार्य-विश्व के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

श्रम धर्म-काम की गरिमा और नैतिक मूल्य की भारतीय सभ्यतागत भावना पर आधारित यह नीति एक ऐसे श्रम संस्कृति की परिकल्पना करती है जो प्रत्येक श्रमिक के लिए सुरक्षाउत्पादकता और भागीदारी सुनिश्चित करे। इसका उद्देश्य एक संतुलित ढांचा तैयार करती है जो श्रमिकों के हितों को बढ़ावा देते हुए उद्यमों को विकसित होने और स्थायी आजीविका उत्पन्न करने में सक्षम बनाता है।

श्रम शक्ति नीति 2025 श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (एमओएलई) को एक सक्रिय रोजगार सुविधा प्रदाता के रूप में स्थापित करेगी जो विश्वसनीय, प्रौद्योगिकी-आधारित प्रणालियों के माध्यम से श्रमिकों, नियोक्ताओं और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय को बढ़ावा देगा। राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) प्लेटफॉर्मरोजगार के लिए भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में कार्य करेगा, जिससे पारदर्शी और समावेशी नौकरी अवसर, प्रमाणपत्र सत्यापन और कौशल संरेखण संभव होगा। ओपन एपीआई, बहुभाषी पहुंच और एआई-संचालित नवाचार के माध्यम से, एनसीएस-डीपीआई, टियर-2 और टियर-3 शहरों, ग्रामीण जिलों और एमएसएमई समूहों में प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करेगा जिससे रोजगार सुविधा एक राष्ट्रव्यापी सार्वजनिक सुविधा बन जाएगी।

यह नीति सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षाव्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्यमहिला एवं युवा सशक्तिकरण तथा हरित एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम रोजगार सृजन पर भी जोर देती है। इसका उद्देश्य एक लचीला और निरंतर कुशल कार्यबल का निर्माण करना है जो उभरती प्रौद्योगिकियों, जलवायु परिवर्तनों और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं की मांगों को पूरा करने में सक्षम हो। ईपीएफओईएसआईसीई-श्रम और एनसीएस जैसे प्रमुख राष्ट्रीय डेटाबेस को एक एकीकृत श्रम स्टैक में एकीकृत करते हुए यह नीति एक समावेशी और अंतर-संचालनीय डिजिटल संस्कृति की कल्पना करती है जो आजीवन शिक्षासामाजिक सुरक्षा और आय सुरक्षा का समर्थन करता है

मसौदा नीति व्यापक हितधारक परामर्शों को प्रतिबिंबित करती है और सहकारी संघवाद, साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण और डिजिटल पारदर्शिता पर ज़ोर देती है। यह केंद्र, राज्यों, उद्योग और सामाजिक भागीदारों के बीच समन्वित कार्रवाई के लिए एक दीर्घकालिक ढांचा प्रदान करती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विकास के लाभ व्यापक और समान रूप से साझा किए जाएं।

राष्ट्रीय श्रम एवं रोजगार नीति-श्रम शक्ति नीति 2025 का मसौदा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, रोजगार महानिदेशालय (डीजीई) और राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) की वेबसाइटों पर उपलब्ध है। हितधारकों, संस्थानों और आम जनता से 27 अक्टूबर 2025 तक ddg-dget[at]nic[dot]in पर अपनी प्रतिक्रिया, टिप्पणियां और सुझाव आमंत्रित है।

मसौदा नीति का विवरण नीचे दिए गए लिंक पर उपलब्ध है:

https://labour.gov.in/sites/default/files/draft_-_mole_le_policy_-_v1.0.pdf

***//पीके/केसी/पीसी/एसके//(रिलीज़ आईडी: 2176401)

“National Labour & Employment Policy-Shram Shakti Niti 2025”

Posted On: 08 OCT 2025 at 4:34PM by PIB Delhi

Ministry of Labour & Employment invites public feedback on Draft 


New Delhi: 08th October 2025
(PIB Delhi//Hindustan Screen Desk//With Input Media Link Ravinder)::

All governments often introduce necessary provisions for laborers and workers. Workers should receive complete security and good wages, along with all the necessary basic amenities. Demands for good wages and a good working environment are also justified. It was under similar circumstances that the Chicago struggles took place. The first week of May became a time of great sacrifice. This struggle brought the red flag to the fore with great force. Workers have been dissatisfied for many years now. Now it remains to be seen whether the new labor policy will satisfy them. Will the New Labor Policy 2025 provide them with better wages and better facilities? Currently, the government has sought everyone's suggestions and ideas on this draft. Let's take a look at what this draft contains. What is the government offering for workers under this new labor policy 2025?

The Ministry of Labour and Employment, Government of India, has released the draft National Labour & Employment Policy-Shram Shakti Niti 2025 for public consultation. The draft policy presents a renewed vision for a fair, inclusive, and future-ready world of work aligned with the national aspiration of Viksit Bharat @2047

Rooted in India’s civilisational ethos of śrama dharma-the dignity and moral value of work, the policy envisions a labour ecosystem that ensures protection, productivity, and participation for every worker. It seeks to create a balanced framework that upholds workers’ welfare while enabling enterprises to grow and generate sustainable livelihoods.

Shram Shakti Niti 2025 positions the Ministry of Labour & Employment (MoLE) as a proactive Employment Facilitator, driving convergence among workers, employers, and training institutions through trusted, technology-led systems. The National Career Service (NCS) platform will serve as India’s Digital Public Infrastructure for Employment, enabling transparent and inclusive job matching, credential verification, and skill alignment. Through open APIs, multilingual access, and AI-driven innovation, the NCS-DPI will connect opportunity with talent across Tier-II and Tier-III cities, rural districts, and MSME clusters, making employment facilitation a nationwide public good.

The policy also places strong emphasis on universal social security, occupational safety and health, women and youth empowerment, and the creation of green and technology-enabled jobs. It aims to build a resilient and continuously skilled workforce capable of meeting the demands of emerging technologies, climate transitions, and global value chains. By integrating key national databases such as EPFO, ESIC, e-Shram, and NCS into a unified Labour Stack, the policy envisions an inclusive and interoperable digital ecosystem that supports lifelong learning, social protection, and income security.

The draft policy reflects extensive stakeholder consultations and emphasises cooperative federalism, evidence-based policymaking, and digital transparency. It provides a long-term framework for coordinated action among the Centre, States, industry, and social partners to ensure that the benefits of growth are shared widely and equitably.

The draft National Labour & Employment Policy–Shram Shakti Niti 2025 is available on the websites of the Ministry of Labour & Employment, the Directorate General of Employment (DGE), and the National Career Service (NCS). Stakeholders, institutions, and members of the public are invited to submit their feedback, comments, and suggestions by 27th October 2025 at ddg-dget[at]nic[dot]in.

Details of the draft policy are available on the link below:

https://labour.gov.in/sites/default/files/draft_-_mole_le_policy_-_v1.0.pdf

*****//Rini Choudhury//(Release ID: 2176333)